‘मन की बात’ में बोले मोदी, खादी को कपड़े की तरह नहीं आंदोलन की तरह देखें

‘मन की बात’ में बोले मोदी, खादी को कपड़े की तरह नहीं आंदोलन की तरह देखें

मोदी ने कहा कि खादी के प्रति रुचि बढ़ने के कारण खादी क्षेत्र में काम करने वालो में, भारत सरकार में खादी से संबंधित लोगों में एक नये तरीक़े से सोचने का उत्साह भी बढ़ा है.

narendra modi

नई दिल्ली: महात्मा गांधी की जयंती से पूर्व प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रविवार (24 सितंबर) को कहा कि खादी एक वस्त्र नहीं, एक विचार है, इन दिनों खादी के प्रति काफ़ी रुचि बढ़ी है जिसके कारण ग़रीब के घर में सीधे रोज़गार पहुंच रहा है. मोदी ने कहा कि मैंने एक बार ‘मन की बात’ में खादी के विषय में चर्चा की थी. और खादी एक वस्त्र नहीं, एक विचार है. मैंने देखा कि इन दिनों खादी के प्रति काफ़ी रुचि बढ़ी है और मैंने स्वाभाविक रूप से कहा था कि मैं कोई खादीधारी बनने के लिए नहीं कह रहा हूँ लेकिन जब अलग अलग तरह के परिधान होते हैं तो एक खादी क्यों न हो ?

आकाशवाणी पर प्रसारित ‘मन की बात’ कार्यक्रम में अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने कहा कि घर में चादर हो, रूमाल हो. अनुभव यह देखने में आया है कि युवा-पीढ़ी में खादी का आकर्षण बढ़ गया है. खादी की बिक्री बढ़ी है और उसके कारण ग़रीब के घर में सीधा-सीधा रोज़गारी का संबंध जुड़ गया है. उन्होंने कहा कि 2 अक्टूबर से खादी में छूट दी जाती है , काफ़ी छूट-रियायत मिलती है. मैं फिर एक बार आग्रह करूँगा, खादी का जो अभियान चला है उसको हम और आगे चलायें, और बढ़ायें. खादी खरीद करके ग़रीब के घर में दिवाली का दीया जलायें, इस भाव को लेकर के हम काम करें. हमारे देश के ग़रीब को इस कार्य से एक ताक़त मिलेगी और हमें करना चाहिए.

उन्होंने कहा कि खादी के प्रति रुचि बढ़ने के कारण खादी क्षेत्र में काम करने वालो में, भारत सरकार में खादी से संबंधित लोगों में एक नये तरीक़े से सोचने का उत्साह भी बढ़ा है. नई तकनीक कैसे लाएँ, उत्पादन क्षमता कैसे बढ़ाएँ, सौर-हथकरघे कैसे ले आएँ? पुरानी जो विरासत थी जो बिलकुल ही 20 से 30 साल से बंद पड़ी थीं उसको पुनर्जीवित कैसे किया जाए.

मोदी ने अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ के 36वें संस्करण में कहा, “मैंने पहले भी कहा था कि खादी कपड़ा नहीं बल्कि आंदोलन है, जिसे आगे ले जाना चाहिए.” मोदी ने कहा कि उन्होंने देखा है कि खादी के प्रति लोगों की रुचि बढ़ी है. प्रधानमंत्री ने कहा कि खादी की बिक्री में भी बढ़ोतरी हुई है जिसके कारण गरीब लोगों के लिए रोजगार के अवसर भी बढ़े हैं. उन्होंने कहा, “हमें इस दीवाली खादी उद्योग में लगे लोगों के घरों को रोशन करने के लिए काम करना चाहिए.”

प्रधानमंत्री ने इस क्रम में बताया कि उत्तर प्रदेश में, वाराणसी सेवापुर में, सेवापुरी का खादी आश्रम 26 साल से बंद पड़ा था, लेकिन आज पुनर्जीवित हो गया. अनेक प्रकार की प्रवर्तियों को जोड़ा गया. अनेक लोगों को रोज़गार के नये अवसर पैदा किये. कश्मीर में पम्पोर में खादी एवं ग्रामोद्योग ने बंद पड़े अपने प्रशिक्षण केंद्र को फिर से शुरू किया और कश्मीर के पास तो इस क्षेत्र में देने के लिए बहुत कुछ है.

मोदी ने कहा कि अब ये प्रशिक्षण केंद्र फिर से शुरू होने के कारण नई पीढ़ी को आधुनिक रूप से निर्माण कार्य करने में, बुनने में, नयी चीज़ें बनाने में एक मदद मिलेगी और मुझे अच्छा लग रहा है कि जब बड़े-बड़े कॉर्पोरेट हाउस भी दिवाली में जब तोहफा देते हैं तो इन दिनों खादी की चीज़े देना शुरू किये हैं. लोग भी एक दूसरे को तोहफे के रूप में खादी की चीज़े देना शुरू किये हैं. एक सहज़ रूप से, चीज़ कैसे आगे बढ़ती है ये हम सब अनुभव करते हैं.

 

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