वित्त मंत्रालय ने कहा, रिजर्व बैंक के सामने नीतिगत दरों में कटौती की गुंजाइश

वित्त मंत्रालय ने कहा, रिजर्व बैंक के सामने नीतिगत दरों में कटौती की गुंजाइश

नई दिल्ली: वित्त मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने शनिवार (23 सितंबर) को कहा कि खुदरा मुद्रास्फीति लगातार निम्न स्तर पर बनी हुई है ऐसे में रिजर्व बैंक के समक्ष अगली मौद्रिक समीक्षा में नीतिगत दरों में कटौती की बेहतर गुंजाइश है. सुस्त पड़ती अर्थव्यवस्था की रफ्तार बढ़ाने के लिये सरकार की तरफ से प्रयास तेज किये जाने के बीच उन्होंने यह बात कही है. रिजर्व बैंक की द्विमासिक मौद्रिक नीति समीक्षा 4 अक्टूबर को होनी है.

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अधिकारी ने कहा, “मुद्रास्फीति के अनुमानों देखते हुये मौद्रिक नीति में नरमी की गुंजाइश है.” अधिकारी ने कहा कि सभी सरकारी विश्लेषण इस आधार पर किये गये हैं कि आने वाले मध्यम काल में मुद्रास्फीति चार प्रतिशत के दायरे में रहेगी. रिजर्व बैंक ने अगस्त में हुयी समीक्षा में मुद्रास्फीति जोखिम में कमी का हवाला देते हुए रेपो दर 0.25 प्रतिशत घटाकर 6 प्रतिशत कर दी थी. यह कटौती 10 महीने में पहली बार हुयी और इससे नीतिगत दर करीब 7 साल के निचले स्तर पर आ गई.

हालांकि, सब्जियां और फल के दाम बढ़ने से अगस्त माह में खुदरा मुद्रास्फीति पांच महीने के उच्च स्तर 3.36 प्रतिशत पहुंच गयी. इससे एक माह पहले जुलाई में खुदरा मुद्रास्फीति 2.36 प्रतिशत पर थी. अधिकारी ने जोर देते हुये कहा कि विभिन्न कारणों की वजह से विनिर्माण क्षेत्र में सुस्ती आयी है. अधिकारी ने कहा कि जैसे ही नोटबंदी और जीएसटी का प्रभाव कम होने लगेगा, हम उम्मीद करते हैं कि विनिर्माण क्षेत्र में वृद्धि आयेगी. लेकिन रुपये की मजबूती के कारण भी यह क्षेत्र प्रभावित हुआ है. खाद्य पदार्थों और ईधन की कीमतों में हुई तेज बढ़ोतरी के कारण देश के थोक मूल्य सूचकांक (डब्ल्यूपीआई) पर आधारित महंगाई दर अगस्त महीने में लगभग दोगुनी होकर 3.24 फीसदी रही. वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक, जुलाई में थोक महंगाई दर 1.88 फीसदी रही थी, जबकि अगस्त 2016 में यह दर 1.09 फीसदी थी. मंत्रालय के मुताबिक, “अगस्त 2017 की थोक महंगाई दर 3.24 फीसदी रही, जबकि जुलाई में यह 1.88 फीसदी थी और अगस्त 2016 में 1.09 फीसदी थी. इस वित्त वर्ष की बिल्ट इन महंगाई दर 1.41 फीसदी रही, जबकि पिछले साल की समान अवधि में यह 3.25 फीसदी थी.”

थोक कीमतें जुलाई में बढ़कर 1.88 फीसदी हो गई, जबकि जून में यह 0.90 फीसदी और मई में 2.26 फीसदी पर थी. सेगमेंट के आधार पर देखें तो प्राथमिक वस्तुओं की कीमत 2.66 फीसदी बढ़ी, जबकि जुलाई में इसमें 0.46 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई थी. डब्ल्यूपीआई में प्राथमिक वस्तुओं का वजन 22.62 फीसदी है. हालांकि साल-दर-साल आधार पर प्राथमिक वस्तुओं की कीमत समीक्षाधीन अवधि में कम रही है, साल 2016 के अगस्त में यह 4.78 फीसदी थी.

खाद्य महंगाई दर बढ़कर 5.75 फीसदी रही जबकि जुलाई 2017 में यह 2.15 फीसदी थी. वार्षिक आधार पर प्याज की कीमतें बढ़कर 88.46 फीसदी रही जबकि आलू की कीमत नकारात्मक 43.82 फीसदी रही. अगस्त में सब्जियों की कीमतें बढ़कर 44.91 फीसदी रही, जबकि अगस्त 2016 में यह नकारात्मक 7.75 फीसदी थी. वार्षिक आधार पर गेंहू सस्ता हो गया है. इसकी दर नकारात्मक 1.44 फीसदी रही है जबकि प्रोटीन आधारित खाद्य सामग्रियां अंडे, मांस और मछली मंहगी हो गई हैं. यह बढ़कर 3.93 फीसदी हो गई.

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