UNGA: सुषमा ने ‘नोटबंदी’ को बताया पीएम मोदी का साहसी कदम, जनधन योजना के पढ़े कसीदे

UNGA: सुषमा ने ‘नोटबंदी’ को बताया पीएम मोदी का साहसी कदम, जनधन योजना के पढ़े कसीदे

सुषमा स्वराज ने कहा कि जनधन योजना के लागू होने के बाद कम से कम ऐसे 30 करोड़ भारतीयों के पास आज बैंक खाते हैं जिन्होंने कभी बैंक के दरवाजे को पार नहीं किया था. यह जनसंख्या अमेरिका की जनसंख्या के बराबर है.

सुषमा ने नोटबंदी को बताया पीएम मोदी का साहसी कदम, जनधन योजना के पढ़े कसीदे

संयुक्त राष्ट्र: विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने शनिवार (23 सितंबर) को कहा कि भ्रष्टाचार की उपजों में से एक कालेधन को चुनौती देने के लिए नोटबंदी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का एक ‘साहसिक’ निर्णय था. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कालेधन, नकली नोट, आतंकवादियों के वित्तपोषण और भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने के लिए आठ नवम्बर 2016 को 500 और 1000 रुपए के नोटों को चलन से बाहर करने का ऐलान किया था. सुषमा ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के 72वें सत्र को संबोधित करते हुए कहा, ‘‘नोटबंदी भ्रष्टाचार की उपजों में से एक ‘कालेधन’ को चुनौती देने के लिए एक साहसी निर्णय था. उन्होंने यह भी कहा कि भारत ने माल एवं सेवाकर विधेयक पारित किया है जिसके जरिये भारत के विभिन्न हिस्सों में कर की विभिन्न और दुखदायी श्रेणियों के स्थान पर पूरे देश में एक ही तरह के कर का प्रावधान किया गया.

सुषमा ने कहा, ‘‘हमारा ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ अभियान लिंग असमानता कम कर रहा है. स्वच्छ भारत अभियान से जो उत्पन्न हो रहा है उसे सामाजिक व्यवहार एवं आदतों में एक क्रांतिकारी परिवर्तन कहा जा सकता है.’’ उन्होंने कहा कि भारत ने कड़े निर्णय लेने में साहस और नेतृत्व क्षमता का प्रदर्शन किया है जिससे आपस में जुड़े स्थायी विकास की प्रक्रिया शुरू हुई है. उन्होंने कहा कि गरीबी का पूर्ण उन्मूलन वर्तमान सरकार की सबसे महत्वपूर्ण प्राथमिकता है.

उन्होंने कहा, ‘‘गरीबी के अभिशाप को दूर करने के लिए दो तरीके हैं. प्रारंपरिक तरीका सहायता में वृद्धि करना और मदद एवं मार्गदर्शन करना है.’’ सुषमा ने कहा,‘‘लेकिन हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अधिक मौलिक रास्ता चुना है और वह है आर्थिक सशक्तिकरण के जरिये. गरीब असहाय नहीं हैं, हमने केवल उन्हें मौके नहीं दिये हैं. हम गरीबी का उन्मूलन गरीबों में निवेश करके कर रहे हैं. हम उन्हें नौकरी मांगने वाले से नौकरी देने वाला बना रहे हैं.’’ उन्होंने कहा कि सभी आर्थिक कार्यक्रम….जनधन, मुद्रा, उज्ज्वला, कौशल भारत, डिजिटल भारत, स्वच्छ भारत, स्टार्ट अप इंडिया और स्टैंड अप इंडिया…का मूल उद्देश्य गरीबों का सशक्तिकरण करना है.’’

उन्होंने कहा, ‘‘जनधन योजना निश्वित रूप से विश्व की सबसे बड़ी वित्तीय समावेशी योजना के तौर पर गिनी जानी चाहिए.’’ उन्होंने कहा कि कम से कम ऐसे 30 करोड़ भारतीयों के पास आज बैंक खाते हैं जिन्होंने कभी बैंक के दरवाजे को पार नहीं किया था . यह जनसंख्या अमेरिका की जनसंख्या के बराबर है. उन्होंने कहा, ‘‘जाहिर है कि इसे तीन वर्षों में पूरा करना आसान नहीं था लेकिन हमारे बैंकों ने हमारे प्रधानमंत्री द्वारा निर्धारित किये गए इस दूरदर्शी लक्ष्य को हासिल किया. लक्ष्य निर्धारित किया गया है कि प्रत्येक भारतीय परिवार का एक बैंक खाता होगा.’’ उन्होंने इसके साथ ही यह भी कहा कि ये खाते ‘जीरो बैलेंस’ पर खोले गए.

उन्होंने कहा कि मुद्रा योजना के तहत सरकार ने ऐसे लोगों को भी वित्तपोषित किया जिनके पास यह सुविधा नहीं थी. उन्होंने कहा, ‘‘जिन लोगों ने कभी सोचा नहीं था कि बैंक रिण उनके विकल्पों में है, उन्हें आज मुद्रा योजना के तहत सूक्ष्म कारोबार के लिए उदार रिण मिल रहे हैं.’’ उन्होंने कहा कि इनमें से 70 प्रतिशत ऋण महिलाओं को मिल रहे हैं.

सुषमा ने उज्ज्वला योजना को सरकार की एक महत्वपूर्ण योजना बताते हुए कहा कि गरीबों को मुफ्त गैस सिलेंडर उपलब्ध कराये जा रहे हैं ताकि महिलाओं को लकड़ी के चूल्हों के गंभीर खतरों का सामना नहीं करना पड़े. उन्होंने कहा कि भारत ने इस वर्ष भारत…संरा विकास साझेदारी कोष शुरू किया है.उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भारत गरीबी से लड़ने में पूरी तरह से लगा हुआ है.

 

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